समाज में स्त्री पुरुष को बराबर नहीं समझा जाता। ये कविता स्त्री पुरुष समानता को इंगित करती है। समाज में स्त्री पुरुष को बराबर नहीं समझा जाता। ये कविता स्त्री पुरुष समानता को इ...
चाँद भी सो गया रात के आगोश में, ऊजाला लेने लगा उबासियां, चाँद भी सो गया रात के आगोश में, ऊजाला लेने लगा उबासियां,
तुम्हारी आँखों को पहले पढ़ लिया करता हूँ तुम्हारी आँखों को पहले पढ़ लिया करता हूँ
पर मतलब तुम्हारे बोलने का तब भी नहीं होगा, पर मतलब तुम्हारे बोलने का तब भी नहीं होगा,
खामोशियाँ तेरे मेरे दरमियां, एक अनजान रिश्ता बनाती है। खामोशियाँ तेरे मेरे दरमियां, एक अनजान रिश्ता बनाती है।
काश मेरी कलम की स्याही से मेरे जज़्बात समझ पाए लोग। काश मेरी कलम की स्याही से मेरे जज़्बात समझ पाए लोग।